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बोलो क्या उपहार दूं....

Posted by AMIT TIWARI 'Sangharsh' On 8/25/2009 04:59:00 PM



दूं तुम्हे अपनी ख़ुशी,
या संसार की हर इक ख़ुशी,
या तुम्हे खुशियों का ही संसार दूं...
बोलो क्या उपहार दूं..

चाँद मांगो चाँद दूं,
हर ख़ुशी आबाद दूं,
या गगन से तोड़कर,
तारे हजार दूं..
बोलो क्या उपहार दूं..

यूं ही हंसी खिलती रहे,
हर ख़ुशी मिलती रहे..
मुस्कान पर हर इक तुम्हारी,
जां निसार दूं..
बोलो क्या उपहार दूं..

गम तो बीते वक़्त की हों दास्ताँ,
दर ख़ुशी पर ही रुके हर रास्ता,
दिल कहे दिल का ही
तुमको हार दूं..
बोलो क्या उपहार दूं..

Amit Tiwari 'Sangharsh', Swaraj T.V.

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Reactions: 

5 Response to "बोलो क्या उपहार दूं...."

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति।
    बधाई!

     

  2. बेहतरिन । बधाई

     

  3. Nidhi Sharma Said,

    भावपूर्ण रचना....
    दिल को छू लेने वाली अभिव्यक्ति...

     

  4. अच्छी कविता.....
    भावपूर्ण और प्रशंसनीय........

    बधाई...

     


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पाश ने कहा है कि -'इस दौर की सबसे बड़ी त्रासदी होगी, सपनों का मर जाना। यह पीढ़ी सपने देखना छोड़ रही है। एक याचक की छवि बनती दिखती है। स्‍वमेव-मृगेन्‍द्रता का भाव खत्‍म हो चुका है।'
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