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"भगतसिंह और उनके साथियों को फांसी पर लटकाने में जल्दबाजी कर गवर्नमेंट ने समस्त देश के मनोभावों को कुचलने का प्रयत्न किया है. उसने ऐसे अवसर पर जो भयंकर भूल की है, उसका संधि पर प्रभाव पड़े बिना नहीं रह सकता."
-हिन्दू (अंग्रेजी)

"राजनैतिक दृष्टि से इससे अधिक शैतानी कार्य की योजना नहीं की जा सकती."
-स्वराज्य ( अंग्रेजी)

"गवर्नमेंट ने विप्लववादियों की सहानुभूति प्राप्त करने का सुवर्ण अवसर हाथ से खो दिया है."
-स्वदेश मित्रम (अंग्रेजी)

"भगतसिंह और उनके साथियों की फांसी से देश के शिक्षित युवकों में भयंकर असंतोष फैलने की संभावना है. उनके प्राणों की भिक्षा के लिए गवर्नमेंट के पास हजारों प्रार्थना-पत्र भेजे गए, सैकडों सभाएं हुईं. परन्तु अंत में उनका परिणाम कुछ भी न निकला. यद्यपि जनता ने इन वीर और अमर देशभक्तों को, जिन्हें कानून ने अंतिम दंड दिया था, जुलुस निकाल कर और अन्य प्रकार से बचाने का प्रयास किया था; उनकी कानूनी कार्यवाही में इतनी भूलें थी, कि यदि गवर्नमेंट चाहती तो उन्हें कानून के आधार पर मुक्त कर सकती थी. इसमें संदेह नहीं कि गवर्नमेंट ने कराची कांग्रेस के अवसर पर उन्हें फांसी पर लटका कर महात्मा गाँधी के मार्ग में कांटे बिछा दिए हैं. "
-लीडर (अंग्रेजी)

"सरदार भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी की सजा रद्द न कर, गवर्नमेंट ने जैसी भयंकर भूल की है, उसकी तुलना कई वर्षों की किसी भयावह घटना से नहीं की जा सकती. इस देश के इतिहास में इतनी सनसनी किसी मामले में नहीं फैली, जितनी इस मामले में. और कभी किसी मामले में फांसी की सजा रद्द करने के लिए देश ने इतनी अनुनय-विनय नहीं की है. "
-ट्रिब्यून (अंग्रेजी)

"सरदार भगतसिंह को फांसी हो गई और सरकार समझती है, कि शायद इन देश-भक्तों को फांसी देकर उसने विप्लववाद का नाश कर दिया है, पर उसे मालूम होना चाहिए, कि इस एक ही घटना से उसकी कठिनाइयाँ हजार गुना बढ़ गयी. और इससे केवल यही भय नहीं है कि विप्लव की आग और भी भड़केगी, वरन यह भी संभव है कि इस घटना से महात्मा गाँधी का प्रभाव भी एकदम कम हो जाए, जिसने देश को खून खराबे से अब तक बचा रखा है. "
-रियासत (उर्दू)

"सरदार भगतसिंह आदि को फांसी देकर सरकार ने केवल अपने ही मार्ग में कठिनता का सामान पैदा नहीं कर लिया है, बल्कि कांग्रेस को भी मुश्किल में डाल दिया है. "
-अवध अख़बार (उर्दू)

"हम यह तो नहीं कह सकते, कि सरकार ने यह काम बुद्धिमानी का किया है या मुर्खता का, क्योंकि यह तो समय ही बताएगा. परन्तु यह अनुमान करना कठिन नहीं, कि इससे देश में बेचैनी बढेगी और महात्मा गाँधी जैसे बुद्धिमान और प्रभावशाली नेताओं का स्थान नवयुवक छीन लेंगे."
-शेर खालसा (उर्दू)

"जहाँ तक देश में शांति की प्रतिष्ठा और भारत तथा इंग्लैंड के सम्बन्ध को कायम रखने का पक्ष है, हमारी राय में इस फांसी से उसको असह्य चोट पहुंची है. लार्ड इर्विन और मि. मैकडोनाल्ड ने एक से अधिक बार दोनों देशों में अच्छा सम्बन्ध स्थापित करने की अपील की थी, जिसके उत्तर में महात्मा गाँधी ने अपना सत्याग्रह बंद कर दिया और सरकार को मौका दिया......परन्तु शोक है कि इन्ही लार्ड इर्विन और मि. मैकडोनाल्ड के शासन-काल में सरदार भगतसिंह आदि को फांसी के तख्ते पर लटका कर देश में शांति के परदे पर बिजलियाँ गिराने की चेष्टा की गई."
-वतन (उर्दू)

"सरकारी हलके में इंग्लैंड और भारत के सम्मानपूर्ण समझौते के शत्रु तो बहुत से हैं, परन्तु जिस व्यक्ति ने वायसराय को इस आखिरी मौके पर इन नौजवानों को फांसी पर लटकाने की सलाह दी है, वह सचमुच दोनों देशों का कट्टर दुश्मन भी है और अत्यंत मूर्ख भी. "
-पंजाब केसरी (हिंदी)

"सरकार की जिद से यह बात सिद्ध होती है, कि उदारता के ढोल पीटने पर भी सरकार अपने हाथ की शक्ति कम नहीं करना चाहती. "
-नवीन भारत (हिंदी)

-Swaraj T.V. Desk
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पाश ने कहा है कि -'इस दौर की सबसे बड़ी त्रासदी होगी, सपनों का मर जाना। यह पीढ़ी सपने देखना छोड़ रही है। एक याचक की छवि बनती दिखती है। स्‍वमेव-मृगेन्‍द्रता का भाव खत्‍म हो चुका है।'
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