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कल यमुना पुल से होकर गुजर रहा था...नजर भव्य अक्षरधाम मंदिर पर जाकर अटक सी गयी.. कितना ही भव्य बना हुआ है यह मंदिर..
लेकिन किस लिए???
मन कहता है कि यह भारत देश ही एक मंदिर है....... और जब तक हम इस मंदिर के परिवेश को सुन्दर बनाये रखने का कोई प्रयास ही नहीं कर रहे, तब फिर ऐसे करोडों रूपये लगाकर हज़ार अक्षरधाम खड़े करने से क्या होगा??
जब तक देश का असली देवता, किसान भूखा रहेगा.. आत्म हत्या करेगा....तब तक आप किसी भी मंदिर की पूजा से स्वर्ग नहीं पहुँच सकते..
वैसे मेरा प्रश्न मंदिर बनने से नहीं है....अच्छा है कि ऐसे और भी भव्य मंदिर बनें...मैं भी आस्तिक प्रवृत्ति का प्राणी हूँ....ईश्वर में गहरी आस्था है...मंदिरों में माथा टेकना अच्छा लगता है मुझे भी....
लेकिन क्षोभ तो यमुना को देख कर पैदा हुआ है....यमुना की हालत देखकर बरबस ही आंसू निकल पड़ते हैं..आज यमुना नदी से नाले में तब्दील होती जा रही है... मैं खोजता हूँ उस यमुना को, जिसके किनारे कदम्ब की छाँव में मेरे कन्हैया बांसुरी बजाते थे.....
हमारा धर्म तो कभी भी प्रकृति-विरोधी नहीं रहा है... तब फिर यमुना की छाती को उजाड़ कर कंक्रीट का जाल बना देना, कौन से धर्म का द्योतक है... प्रकृति के साथ चलते हुए ऐसे हजारों मंदिरों का समर्थक हूँ मैं भी...लेकिन प्रकृति से खिलवाड़ करके बनाए गए इस मंदिर से मेरे मन को कोई शांति नहीं मिलती.. ..लेकिन याद रखना होगा हमें कि अगर यमुना के दामन पर दाग लगेगा तो फिर यहाँ के निजाम का दामन भी बेदाग नहीं रह सकता.
प्रकृति के साथ ऐसा ही एक खिलवाड़ मेट्रो के नाम पर किया जा रहा है.. आज भी इस हस्तिनापुर पर राज तो मनमोहन का ही है....लेकिन ये मेरे मोहन नहीं हैं...क्योंकि इन्हें कदम्ब के पेड़ों से कोई लगाव नहीं है...यह यमुना किनारे कदम्ब की नहीं मेट्रो की खेती कर रहे हैं...
श्रीधरन जी को थोडा सा भी इतिहासबोध होता...या कि तनिक सा भी लगाव होता इस यमुना से, तो वो कटीली झाड़ियों के बदले कदम्ब के वृक्ष लगा रहे होते यमुना बैंक पर...आपको मेट्रो के विकास का श्रेय तो मिल ही रहा है...यमुना की संस्कृति बचाने का शुभकार्य भी कर लेते...
आप विकास कीजिये, मंदिर बनाइये, मेट्रो बनाइये, मगर कम से कम प्रकृति की प्रवृत्ति को तो ध्यान में रखिये..
विकास के नाम पर यमुना की छाती पर किये जा रहे इस तांडव को आखिर कब तक बर्दाश्त किया जाता रहेगा....?

Reactions: 

1 Response to "यमुना की छाती पर विकास का तांडव"

  1. SAHI KAH RAHE HAIN AAP..........
    BHALA YAMUNA KE PARIVESH KO UJAD KAR BANE HUE IS MANDIR SE KAUN SA SWARG MIL JAYEGA...YA FIR YE METRO HI KAUN SA SWARG KA MARG KHOL DEGI.....??

    YAMUNA KI RAKSHA KA PRAYAS KARNA HI HOGA.

     

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पाश ने कहा है कि -'इस दौर की सबसे बड़ी त्रासदी होगी, सपनों का मर जाना। यह पीढ़ी सपने देखना छोड़ रही है। एक याचक की छवि बनती दिखती है। स्‍वमेव-मृगेन्‍द्रता का भाव खत्‍म हो चुका है।'
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