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'जिन्ना का जिन्न' लगातार विकराल रूप धारण करता जा रहा है. आडवाणी को अध्यक्ष पद गंवाना पड़ा, क्योंकि उन्होंने जिन्ना को सेकुलर कह दिया और उनकी मजार पर चादर चढाया. जसवंत को तो दल से ही बाहर कर दिया गया. रामनामियों ने अपने हनुमान का ही कत्ल कर दिया. भाजपा का तोप शांत हो गया. सुधीन्द्र कुलकर्णी ने अपनी शहादत दे दी.

'वर्शिपिन्ग फाल्स गोड' लिखने वाले अरुण शौरी ने भाजपा को 'ब्लंडर लैंड' तथा 'कटी पतंग' कह डाला. न्यूज लिखने तक भाजपा ने शौरी की शरारत को संगीन मान लिया, शायद उनकी विदाई हो रही होगी.

यह 'जिन्ना फ्लू' भाजपा से निकलकर एनडीए के अन्य घटक दलों को भी अपनी जद में लेने लग गया है. जसवंत से जिन्ना-फ्लू जद(यू) तक पहुँच गया है. जद(यू) नेता शरद यादव ने कह दिया कि जसवंत की किताब पर बैन नहीं लगाया जा सकता है. इधर हरियाणा का पुराना गठबंधन टूटकर बिखर गया है. भाजपा हरियाणा में अलग-थलग पड़ गयी है. महाराष्ट्र में शिवसेना अलग ही ताल ठोंक रहा है.

संघ के पूर्व संघचालक के.सी. सुदर्शन ने जिन्ना को राष्ट्रवादी घोषित कर दिया है. हो.वे. शेषाद्री ने अपने चर्चित पुस्तक 'यों देश बंट गया' में जिन्ना को लगभग क्लीन चिट ही दिया है. सुदर्शन के बयान आने के बाद देश भौंचक हो गया है. आखिर सुदर्शन ने जलती-पकती भाजपाई आग में इतना घी क्यों डाल दिया?
सुदर्शन के बयान के बाद जिन्ना विवाद की दिशा बदल गयी है. दशकों से जो स्वयंसेवक जीवन लगाया, अखंड भारत का सपना संजोया, आज वह सपना टूट-टूटकर बिखर रहा है.
मोहन भगवत क्या करना चाहते हैं? क्या अन्दर की रणनीति है, वह विचारणीय है. क्योंकि संघ कभी भी लूज गेम नहीं खेलता....

संभव है कि जैसा कि गोविन्दाचार्य ने पार्टी को भंग कर नयी वैकल्पिक राजनीति की शुरुआत की बात की है, उस दिशा में संघ आगे बढे या फिर इस ड्रामेबाजी से भाजपा को मीडिया में बनाये रखने का खेल हो....!
अगर जिन्ना को लेकर निकालने की ही बात है, तो सुदर्शन को भी संघ से निकालना चाहिए.

महंगाई, मुद्रा स्फीति, भुखमरी चरम पर है. गरीबों का जीना मुहाल हो गया है, इस वक़्त में भाजपा को मजबूत प्रतिपक्ष की भूमिका निभाना चाहिए, ना कि इस नकली मुद्दों में देश को फंसाकर रखना चाहिए.
देश को इतिहास की जरूरत अभी नहीं है. अभी इतिहास नहीं, रोटी चाहिए. इतिहास-इतिहास कर के भाजपा देश की आम जनता का उपहास कर रही है.

अगर इतिहास की ही बात करनी है तो जिन्ना के जीवन चरित्र पर एक श्वेत-पात्र ही जारी कर दे भाजपा. सत्य पर कितना रॉब दिखायेंगे भागवत..

एक नज़र जिन्ना पर.
(१) गाँधी ने जिन्ना को कायदे-आजम (महान नेता) कहा.
(२) पिता का नाम पूंजी भाई झीना भाई और माँ का नाम रत्ना बाई था तथा बेटी का नाम दीना बाई...
(३) ना दाढ़ी ना टंगा पायजामा...
(४) जिन्ना को मुसलमानों से बदबू आती थी..
(५) १९२५ में संविधान सभा में जिन्ना ने कहा कि मैं भारतीय हूँ..
(६) पृथक मतदान का विरोधी..
(७) तिलक के अपमान का बदला जिन्ना ने वेलिंग्टन से लिया..
(८) १९३३ में जिन्ना ने 'रहमत अली' के 'पाकिस्तान' शब्द का मजाक उड़ाया. उन्हें काफिर कहा..
(९) १९३८ तक जिन्ना का रसोइया हिन्दू, ड्राइवर सिख, क्लर्क ब्राह्मण, गार्ड हिन्दू(गोरखा), संपादक ईसाई, डॉक्टर पारसी था.

उपर्युक्त बिन्दुओं से न्यूनतम चरित्र तो झलकता ही है, जिन्ना का..
'कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, वरना यूं ही कोई बेवफा नहीं होता........'


आखिर संघ को गुस्सा किस बात को लेकर है. पटेल के अपमान को लेकर नाराजगी है, कि जिन्ना की प्रशस्ति पर, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पा रहा है. सुदर्शन के बयान के बाद देश चिंतित है, जानने के लिए कि इसके पीछे का खेल क्या है? करोडों स्वयंसेवक भी तो हमारे देश के हैं. इन स्वयंसेवकों के साथ होने वाले छल से भी तो देश की ही क्षति है.
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-Vijayendra, Group Editor, Swaraj T.V.

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Reactions: 

9 Response to "क्या के.सी.सुदर्शन को भी संघ से निकाल देंगे??"

  1. Anonymous Said,

    logo ko galat jaankari na de...
    Sudarshan ne kaha tha : JINNA KE ANEK ROOP HUWE HAIN. EK WAQT ME JINNA RASHTRA (AVIBHAJIT BHARAT) KE LIYE PURI TARAH SAMARPIT THE AUR LOKMANYA TILAK KE SAATH THE.
    -----------
    apne lekh me aapne LAGBHAG CLEAN CHIT kahkar maamle ko anavashyak tool dene ka prayas kiya hai.
    -----------
    lekh me aapne mudde ka vishleshan kiya hota to pathniya hota, lekin aapke kayas lagaane se jahir hota hai k apko bhi is maamle me rajniti ki gahri jankari nahi hai.

     

  2. भाई, आपको स्वयंसेवकों की चिन्ता कब से होने लगी? :)
    रही भाजपा की बात, तो क्या भाजपा ने सशक्त विपक्ष होने का ठेका ले रखा है? जब भाजपा मजबूत थी तब भी आपको तकलीफ़ थी, अब भाजपा कमजोर है तब भी आपको कष्ट है, आखिर समस्या क्या है?
    क्या देश की वर्तमान समस्याओं के लिये भाजपा जिम्मेदार है? यदि नहीं, तो उन पर कलम चलाइये, जो आम जनता की इस दुर्गति के जिम्मेदार हैं। भाजपा के कमजोर होने पर आप खुश रहें, इसी में हमारी भी खुशी है। संघ-भाजपा को जो निपटना होगा आपस में निपट लेंगे… :) :) आप काहे तकलीफ़ करते हैं।

     

  3. VIJAYENDRA Said,

    aadarneeya sureshjee.
    bjp naa to sashakt vipaksh hone ka theka le rakha hai na hee deshvakti ka .bjp majboot hokar sashakt vipaksh bane yah to chahata hee hoon .desh kee durgati congress ne bhee utanee hee kee hai.sabne apne- apne hisse ke hidustan ko loota hai khansota hai.mujhr dard hai kee maine bhee apanee jindgee tabah kee hai. kya huaa tha swadesee kee kokh se niklee sarkar kokh ko kis prakar kalankit kiya tha aapko bhee pata hoga.vajpayee se ummeed to sabon ko thee kee desh me swadesee, swablamban ka mahaul banega ,par kya huaa, dard iskaa hai suresh bhai------VIJAYENDRA

     

  4. भाजपा में मची उठा पटक ने न kewal भाजपा को कमजोर किया है, बल्कि भारत के स्वस्थ्य लोकतंत्र पर भी खतरा मंडराने लगा है, हलाँकि इसके लिए भाजपा के शीर्ष नेता ही जिम्मेदार रहे है, लेकिन इसके पीछे कांग्रेस और बाजारवाद और राजनीती के चंगुल में फंसी पत्रकारिता जगत भी जिम्मेदार दिखाई दे रही है. अगर देश के लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका कमजोर हो जाती है तो इसका खामियाजा जनता को उठाना पड़ेगा, क्योकि सरकार तानाशाही की तरफ बढ़ जाएगी.

     

  5. संघ और भाजपा के अन्तर्संबंधों पर लिखना मना है, सुरेश जी का यही कहना है। यह पति-पत्नी का आपसी मामला है। तीसरे का दखल प्रतिबंधित है।

     

  6. आदरणीय द्विवेदी जी…
    "…महंगाई, मुद्रा स्फीति, भुखमरी चरम पर है. गरीबों का जीना मुहाल हो गया है, इस वक़्त में भाजपा को मजबूत प्रतिपक्ष की भूमिका निभाना चाहिए, ना कि इस नकली मुद्दों में देश को फंसाकर रखना चाहिए. देश को इतिहास की जरूरत अभी नहीं है. अभी इतिहास नहीं, रोटी चाहिए.…" यह लिखा है विजयेन्द्र जी ने निर्माण संवाद पर…।

    इतिहास नहीं रोटी चाहिये, लेकिन रोटी देने की जिस शासक दल की जिम्मेदारी है उसे गरियाना छोड़कर भाजपा को उपदेश पिलाये जा रहे हैं…। और इस तथाकथित "इतिहास" को लेकर सबसे अधिक हंगामा और कवरेज किसने खड़ा किया है? मीडिया ने। क्यों नहीं मीडिया ने जिन्ना/भाजपा से जुड़ी खबरों का बायकॉट कर दिया, और "रोटी" की खबरों पर ध्यान दिया? लेकिन असल में मीडिया का एक अघोषित शगल है, भाजपा-संघ की खिंचाई करना, चाहे वह किसी भी कारण/बहाने से हो…। इसी प्रवृत्ति पर था मेरा वह कमेंट… कि पहले कांग्रेस के 100 पाप देखो, उसके बाद भाजपा को एक सलाह दें… लेकिन वह होगा नहीं, क्योंकि कांग्रेस के खिलाफ़ लिखने-बोलने में कुछ "रहस्यमय कारण" आ जाते हैं… :)

     

  7. सम्माननीय,
    कांग्रेस के सौ पाप देखने की सलाह तो अच्छी है, लेकिन भाजपा के हजारों का क्या हिसाब?
    बहरहाल आप किस रहस्यमय कारण की बात कह रहे हैं........जरा खुलकर बोल देते तो सहूलियत होती जनता को, समझने में...!
    भाजपा को जब आप कांग्रेस की तुलना में ही पापी बनाने के इच्छुक हैं, तब फिर 'Party with a difference' का नारा काहे देते हो?

     

  8. सुरेश जी,
    आज के लगभग सभी अखबारों की प्रमुख खबरें पढ़ लीजिये....
    सुदर्शन जी ने क्या कहा?

    हमने वही बात दो दिन पहले कह दी, तो आप हमें ना जाने कौन-कौन सा विरोधी कहने लगे....!
    बेहतर है, अर्जुन मोह से बाहर निकलकर इस वक़्त की राजनीति को समझिये..
    हमें चिंता संघ या स्वयंसेवक की नहीं, हमें देश की चिंता है.
    और आप जैसे बुद्धिजीवियों से भी स्वस्थ विमर्श की उम्मीद है..

     

  9. Anonymous Said,

    iss blog par yahi ummeed thi.
    yaha bahas karna mana hai.
    yaha ek banda likhta hai, dusra aur tisra vah-vah karta hai aur agar kisi ne kuchh alochana kar di to chautha kaat khane ko daudta hai. ye blog girohbazi ka badhiya namuna hai.

     

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पाश ने कहा है कि -'इस दौर की सबसे बड़ी त्रासदी होगी, सपनों का मर जाना। यह पीढ़ी सपने देखना छोड़ रही है। एक याचक की छवि बनती दिखती है। स्‍वमेव-मृगेन्‍द्रता का भाव खत्‍म हो चुका है।'
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