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यह अब तक का एक सच है, कि स्त्री आज भी अपनी आजादी का अनुभव नहीं कर पायी है. आज भी स्त्री के साथ होने वाला व्यवहार शोचनीय ही है. अभी दो दिन पहले ही समाचार मे आया कि हैदराबाद की एक लड़की ने दहेज की मांग के चलते आत्महत्या कर ली,उसी दिन एक गैंग रैप की खबर और एक औरत के यौन उत्पीड़न की ख़बर भी थी. यह समाचार सुनकर हमें अपनी प्रतिक्रिया ही नहीं समझ आ रही थी, कि हम अब क्या कहें या सोचें?

हमारी जिंदगी का क्या अस्तित्व है? हम क्या है? कोई जानवर, जो दूसरो के द्वारा हांका जाता हो, जिसके साथ वो अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकते है.
क्या यही सच है?

नहीं! ये सच नही हो सकता. हम इतने कमजोर नही हैं, कि किसी के हाथ की कठपुतली बने रहे. बचपन से आज तक हमने ऐसी कितनी खबरें सुनी होगी, जिन्हें सुनकर रूह भी कांप जाती है. मई यह सोचती हूँ कि जिसके साथ ये घटनाएं होती हैं, उनका क्या हुआ होगा? वो तो शायद जिंदगी से ही मुह मोड़ चुकी होगी.

आज भी ऐसे कई स्त्रिया है, जो उस डर के साए मे जी रही होगी. अगर आपके आस-पास कोई ऐसी घटना हो रही है, तो आप उनकी मदद कर सकते हैं, प्रत्यक्ष न सही तो अप्रत्यक्ष रूप से. आप किसी संस्था या नजदीकी पुलिस स्टेशन मे इसकी जानकारी दे सकते है, या और भी बहुत कुछ. आप को आगे आना होगा.
हम, आप और हम सब मिल कर ही तो इस दुष्चक्र को रोक सकते हैं.

आप का उठाया एक कदम किसी की जिंदगी बना सकता है, आपकी अंतरात्मा भी आप का साथ देगी, अगर आप किसी की जिंदगी को बचाने के लिए कोई कदम उठायेगे. कई बार हमारे सामने हुए किसी अपराध को न रोक पाने के कारण हम जीवनभर उसके लिए ख़ुद को गुनाहगार मानते रहते हैं.
उम्मीद है शायद आप कुछ विचार अवश्य करेंगे....
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-Ashi

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Reactions: 

4 Response to "उम्मीद है शायद आप कुछ विचार अवश्य करेंगे...."

  1. ये कोई नयी खबर नही है, ऐसा हमारे समाज मे होता आया है जो की एक अभिशाप है हमारे समाज के लिए। इससे बचने का उपाय एक ही है कि औरते अपनी शुरक्षा का दायित्व खुद संभाले।

     

  2. Anonymous Said,

    ye comment sirf upar ke comment dene wale ke liye haiap jo kah rahe hai wo sahi hai par agar nari ke samman ko bachane mai aap apna sahyog dege to kya aap ko bhinn mahsus hoga.
    agar aap kisi nari ke madad nai kar sakte too aap sock sakte hai aap ka bhi pariwar hai aur aap jaise kai aur bhi hoge

     


  3. yeh satya hai, aur sath hi ek khabar bhi hai.
    lekin durbhagya yahi hai ki yah ek khabar hai.
    ise akhir kb tak khabar ki tarah se padha aur bhulaya jata rahega?
    jaroorat hai ki iss samaj ko aisi khabaron ki adat ho gai hai, use badalaa jaaye......
    aur iss sab mein hamara bhi yogdan aavashyak hai.
    iss prashn ko uthana hi nahi iske samadhan ka prayas bhi hame hi karna hoga.

     

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पाश ने कहा है कि -'इस दौर की सबसे बड़ी त्रासदी होगी, सपनों का मर जाना। यह पीढ़ी सपने देखना छोड़ रही है। एक याचक की छवि बनती दिखती है। स्‍वमेव-मृगेन्‍द्रता का भाव खत्‍म हो चुका है।'
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