Blog Archive

Bookmark Us!

मेरा जीवन, मेरा प्रेम ..........!!

Posted by VIJAYENDRA On 7/28/2009 10:30:00 AM



एक प्रेम कहानी लिखने बैठा था. विचार सहज रूप से शब्दों में परिवर्तित होकर कहानी का रूप लेने लगे थे, परन्तु जैसे ही कलम को कागज पर रख रहा हूँ, सब कुछ परिवर्तित होता जा रहा है. मन में प्रेम की परिभाषा ही स्पष्ट नहीं हो पा रही है, तो फिर प्रेम कहानी कैसे तैयार होगी?
प्रश्न उठ रहा है कि प्रेम क्या है? मैं प्रेम कहूँ किसे? क्या उस भावना को जो मेरे मन में किसी 'एक' को लेकर पैदा हुई और उस एक के साथ ही समाप्त हो गयी. या फिर मैं प्रेम कहूँ उस भावना को जो यूँ ही किसी बच्चे की एक बिलकुल निर्दोष सी हंसी देखकर मन में उमड़ पड़ती है? या कि प्रेम कहूँ उस भावना को जो किसी का कष्ट देखते ही मन में पैदा हो जाती है और सहज ही मन उसके कष्ट में डूब सा जाता है?
कभी-कभी लगता है कि प्रेम तो मैंने किया ही नहीं कभी; जब सुनता हूँ मैं किस्से उन प्रेमियों के जिन्हें जिद थी, प्रतिस्पर्धा तो थी परन्तु एक दुसरे से अधिक त्याग कर देने की. जो झगड़ते तो थे परन्तु कुछ पाने के लिए नहीं, वरण कुछ देने के लिए. जिन्हें प्रेम था सच्चा अपनी मातृभूमि से, अपने देश से. और एक हम हैं; प्रेम खोज रहे हैं किसी प्राणी में. कभी उस अलौकिक प्रेम का आनंद ही नहीं लिया. राष्ट्र के बारे में कुछ सोचने-करने का सुख प्राप्त ही नहीं किया, और अपने आप को प्रेमी समझ बैठे . एक वो थे कि राष्ट्र को कष्ट हुआ तो मरने चल पड़े, और एक हम हैं, राष्ट्र तड़प रहा है लेकिन सोचने की फुर्सत नहीं है.
आर्श्चय है! हम प्रेमी होने का दंभ तो पाले हुए हैं मगर हमें प्रेम का अर्थ ही पता नहीं चला.
काश हमें प्रेम की सच्ची अनुभूति हो सके!!
--Amit Tiwari 'Sangharsh', SwarajT.V.

Reactions: 

3 Response to "मेरा जीवन, मेरा प्रेम ..........!!"

  1. Tullujee Said,

    SAHI KAHA AAPNE HUM PREM KHOJ RAHEN HAIN PRANI MAIN

     

  2. bahut hi sundar bhaw liye huye post ....

     

  3. ashi Said,

    aap ka article wakai kabile tariif hai
    desh ke liye prem ush ke liye kuch kar gujarne ka jajba hi kuch aur hota hai ush mai diloo mai nafrat nai kuch aisa karne ki chahat hote hai jo apne desh ke dhuk ko dhek kar apne aap ko pirit mahsus karte hai
    pyr wo jasba hai jo sirf dusaro ki khusi dhudta hai chahe shke liye ushe kurbaan hi kyo na hona pade

     

चिट्ठी आई है...

व्‍यक्तिगत शिकायतों और सुझावों का स्वागत है
निर्माण संवाद के लेख E-mail द्वारा प्राप्‍त करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

सुधी पाठकों की टिप्पणियां



पाश ने कहा है कि -'इस दौर की सबसे बड़ी त्रासदी होगी, सपनों का मर जाना। यह पीढ़ी सपने देखना छोड़ रही है। एक याचक की छवि बनती दिखती है। स्‍वमेव-मृगेन्‍द्रता का भाव खत्‍म हो चुका है।'
****************************************** गूगल सर्च सुविधा उपलब्ध यहाँ उपलब्ध है: ****************************************** हिन्‍दी लिखना चाहते हैं, यहॉं आप हिन्‍दी में लिख सकते हैं..

*************************************** www.blogvani.com counter

Followers