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सरयू बह रही है। सृजन के संगीत का स्वर इसकी कल-कल धारा से सुनाई नहीं पड़ता। इसके किनारे किसी राम के जन्म की किलकारियां नहीं गूंजती। सरयू में अब विध्वंस का शोर है। कभी मन्दिर टूटने का, तो कभी मस्जिद टूटने का। सामासिक संस्कृति की जलती चिता का धुआं ही चारों ओर दिख रहा है। राख में तब्दील हो रही गंगा-जमुनी संस्कृति के विलाप को देख-सुन, सरयू विवश है.....।
अली और बली के दुश्मनों ने मन्दिर तोड़ा, फ़िर मस्जिद तोड़ा। हिंदू और मुसलमानों के लहू से लाल होता रहा सरयू का पानी .......।
इधर राम का मुद्दा पुनः १७ बरस बाद राजनीतिक वनवास से वापस लौटा है।राम वोट दिलाऊ हैं या नहीं? विचार होने लगा। राम को छोड़ दें या पकडें? यह चर्चा शुरू हो गई। मंदिर छोड़ महासेतु की ओर बढ़ गए। रामधारी पार्टी के नेता जिन्ना के यहाँ भी हो आये । रामरथ पर सवार पार्टी सत्ता तक नहीं, सत्ता के करीब तक तो पहुँची मगर राम के किस काम का? पार्टी राम-मंदिर के नाम पर सहमति तक नहीं बना पाई। इस दिशा में कहीं कोई प्रयास नहीं हुआ।
अब लिब्राहन समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होने को है। रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी जा चुकी है। फिर से सरयू के पानी में उबाल आने वाला है। अख़बार के पन्ने रंगने लग गए हैं। मरा हुआ हर तंत्र जिन्दा होने लग गया है
इधर सरयू का पानी बहुत बह चुका है, परिस्थितियां बहुत बदल चुकी हैं। कारसेवकों के दुलारे कल्याण वर्तमान में मुल्ला-मुलायम के साथ हो लिए। उमा-गोविन्द का रामधुन अलग चल रहा है। ऋतंभरा का चिल्लाना बंद हो गया है। वह अपने धर्म उद्योग में लग गयी हैं। महावीर मोदी, राम पर भारी पड़ रहे हैं। तोगडिया का त्रिशूल अब कोई पकड़ नहीं रहा है। कटियार भड़ास निकाल रहे हैं। निठल्ले साधू उदास बैठे है।
पर अब राम मंदिर निर्माण का दूसरा अध्याय शुरू होने वाला है। मामला केवल कमंडल या त्रिशूल चमकाने का नहीं है, बल्कि मंदिर विरोधी नेता को भी अपनी खोई जमीन हासिल होगी। कांग्रेस का जनाधार बढेगा; मुस्लिम महत्वपूर्ण हो जायेंगे। लालू, भाजपा को लेकर नीतीश को घेरेंगे। अगर भाजपा नेता जेल गए,तो भाजपा जीवित हो जायेगी; और भाजपा-विरोधी की स्थिति भी सुधर जायेगी। खेल अब भाजपा और कांग्रेस के बीच है। क्षेत्रीय दल यूँ ही हासिये पर जायेंगे। कांग्रेस अगर लिब्राहन समिति की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने में ईमानदार नहीं रही तो बेशक भाजपा मजबूत होगी। फिर देश साम्प्रदायिकता की अग्नि में झुलस जायेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी कांग्रेस की होगी।
अमेरिका पञ्च बनने के लिए इंतजार कर रहा है। आतंकवाद के नाम पर एशिया में दखल बढ़ी ही है; अब भारत भी उसके निशाने पर है।
-- Vijayendra, Group Editor, Swaraj T.V.

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पाश ने कहा है कि -'इस दौर की सबसे बड़ी त्रासदी होगी, सपनों का मर जाना। यह पीढ़ी सपने देखना छोड़ रही है। एक याचक की छवि बनती दिखती है। स्‍वमेव-मृगेन्‍द्रता का भाव खत्‍म हो चुका है।'
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