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भातीं भातीं के रंग लिए आई रे होली ,
कभी ख़ुशी कभी दुःख लिए छाई ये होली ,
बिचड़ो को अपनों से मिलाने आई रे होली,
भातीं भातीं के रंग लिए छाई रे होली

कभी अपनों के प्यार से भरमाई ये रंघोली,
कभी भिचिड़ने का गम लिए घबराई ये रंग होली ,
कभी बचपन की यादों को सजाये ये होली,
कभी जवानी की आहात से शर्मायें ये होली

दोस्ती का नया पैगाम लिए आई ये होली,
अपनों का सलाम लिए आई ये रंघोली,
दुश्मनी भूल प्यार का फरमान लिये आई ये होली,
चाहतो के नए रंगों मई छाई ये होली

होलिका को मार ,प्यार का नया त्यव्हार लायी है होली
खुशियों के पंख लगाके आई ये होली
भातीं भातीं के रंग लिए आई रे होली ,
भातीं भातीं के रंग लिए छाई रे होली

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पाश ने कहा है कि -'इस दौर की सबसे बड़ी त्रासदी होगी, सपनों का मर जाना। यह पीढ़ी सपने देखना छोड़ रही है। एक याचक की छवि बनती दिखती है। स्‍वमेव-मृगेन्‍द्रता का भाव खत्‍म हो चुका है।'
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