होली, होली का नाम सुनते हई हमारे सामने रंगों की बाहार आ जाती हैं और मन प्रफुल्लित होने लगता है। हां लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होगे जो इन रंगों से दूर भी रहना कहते होगे ,क्यों की उन्हें लगता होगा की ये एक ऐसा त्यव्हार जिसमे लोग जबरजस्ती गले पड़ते है ।
ये सब की अपनी अपनी धारणा है , वैसे ये तो सब ही जानते है की होली क्यों मानते है-साधारणतया कहे तो अच्छाई की बुराई पर विजय ।
परन्तु क्या आप कह सकते है आज जिस त्यव्हार को हम इतनी हर्सुउलाश से मानते है, उसके सही मायने हमारी अंतरात्मा समझती है? क्या इस कलयुगी राक्षस ने हमारी मति को शून्य कर दिया है?
हम अपने स्वार्थ मे इस कदर डूब चुके है की, हम अपने सांस्क्रतिक त्यव्हारो के मोल मंत्रो को हई भूल चुके है। एक दुसरे के प्रति द्वेष, घर्णा और बदले की भावना को दिल मे बसाये इन त्यव्हारो को मोज मस्ती और छुट्टीयों का श्रोत समझ कर मानते है। कभी ये सोचने का अर्थ हीनहीं होता की क्या हम अपने मोल सिधान्तों को समझ भी पा रहे है या नहीं। त्यव्हार है मौज मस्ती करो ,खाओ पियो और ऐस करो, हमे इतनी मुस्किल से तो काम से छुट्टी मिलती है, कौन से मोल मंत्र और कौन से सिधांत,ये हमारी सोच है। पर क्या कभी हम मे से किसी के दिल मे ख्याल आया की जिन त्यव्हारो को हम इतनी प्राथमिकता देते है- उनके मंत्रो को अपनी जीवन शैली मे लाये और आपस मे भाई चारा और प्रेम की आस्था बढ़ाये।
जिस पल हम होलिका माता को जलाते है उनके साथ हम अपने एक बुराई को भी जला दे ,अपनी गलतियों को न द्हुराने का प्रण ले, दुसरो को माफ़ में करने की प्रतिज्ञा ले और सब के एक समान समझें। जब इश्वर ने जाती- धर्मं, अमीर- गरीब का भेद नहीं किया तो क्या हम ऐसी तुच्छ बातों को महत्वता दे कर अपने आराध्य को ऊपेचित उ नहीं कर रहे?
होली -दिवाली जैसे त्य्व्हारों का अर्थ प्रेम और सद्भावना जैसे आचरण को समझना और समझाना है।
आजकल समाचार पत्रों मे ये आम बात हो गयी है की ,त्यव्हारो के दौरान कोई न कोई हादसा ,हई खून, हत्या जैसे साधारण ख़बर हो गयी है। आये दिन कही न कही रेड अलर्ट घोषित होता रहता है। क्या ये आतंकवादियों की साजिश होती है,या कही कोई शैतान जो हमारे अन्दर लालच और द्वेष की भावना को भड़का रहा है हमे अपनों से ही दूर कर रहा है। हमे अपने त्यव्हारो का असली मतलब,इनका मोल मंत्र समझना होगा हमे अपनी अंतरात्मा को सच्चाई से अवगत करना होगाऔर हमारे और हमारे अपनों के अन्दर छुपे उस राक्षस को उस पवित्र अग्नि में ख़तम करना होगा।
आओ मिल कर करे ये वादा की हम अपनी संस्कृति से मिली अनमोल धरोवर को संझो कर रखेगे और इनका सही अर्थ सभी को समझायेगे।
होली है होली मिल कर मनाओ, और प्रण कर अपने अन्दर के राक्षस को जलाओ
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सुधी पाठकों की टिप्पणियां |
पाश ने कहा है कि -'इस दौर की सबसे बड़ी त्रासदी होगी, सपनों का मर जाना। यह पीढ़ी सपने देखना छोड़ रही है। एक याचक की छवि बनती दिखती है। स्वमेव-मृगेन्द्रता का भाव खत्म हो चुका है।'
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