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मोबाइल एक छोटा सा यन्त्र जो आज कल आमिर गरीब सब के पास होता है । जिसके लाखों उपयोग हमें रोज सुनने और देखने को मिलते है। हम भी इसकी जरूरतो को मानते और समझते है। परन्तु आज मै आप की चेतावनी देना चाहूगी उन लोगो को जिन्हें शो ऑफ मतलब दिखावा करने का ज्यादा शौक है कृपया इस बात पर जरुर गौर करें ये मेरी आप सब से गुजारिश है कि किसी से भी सस्ते सेकंड हैण्ड मोबाइल लेने की गलती न करें ,जब तक आप को उस इन्सान या मोबाइल के बारे मै सारी मालूमात न होकहीं आप का भविष्य चढ़ावा न बन जाये दिखावे का आप को लग रहा होगा ,ये तो हम सब को पता है- इस में इतना खास क्या है हम जानते है सब इस बात को जानते है पर अमल कुछ ही करते है । आप को एक किस्सा सुनती हू और शायद जो रोज समाचार पढते होगे वो जानते हो -हमारे एक मित्र बी. टेक कर रहे थे, उन्हें मोबाइल का बड़ा शौक था ,उन्हें किसी आदमी ने एक नया handset ६०० रुपये मे दे दिया, वो बहुत खुश इतना महगा मोबाइल इतनी सस्ते में मिल गया उन्हों ने न आदमी के बारे मे पता किया न ही कोई पेपर लिए, कुछ दिन बाद पुलिस उनके घर पहुची और उन्हें जेल मे बंद कर दिया, उन्हों ने सब बताया पर किसी ने विश्वास नहीं किया मीडिया ने इस किस्से को और हवा दे दी परन्तु उन्हें भी पूरा सच नहीं पता था और उनका भविष्य तबाह हो गया ,अगर उन्होंने "दिखिवे" और "सस्ता मिल रहा है लेलो" के चक्कर मे न पड़ते तो आज वो एक उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर कर रहे होते लेकिन वो आज अपनी एक गलती के लिए हर पल रोते है, हम नहीं चाहते की किसी की भी जिंदगी मे ऐसा कुछ हो इस लिए हमारी आप सब से गुजारिश है की कृपया किसी भी वस्तु को लेने से पहले उसके सभी कागज जरुर देख ले अपनी छोटी छोटी इच्छाओ को पूरा करने के लिए अपनी जिन्दगी बरबाद न करे . किसी के दिखने से क्या होगा क्या वो आप को दे जायेगे ,नहीं ,आप अपनी जिंदगी को सही दिशा मे अग्रसर करे भविष्य मे आप इतने काबिल हो जायेगे की आप अपने ओर दुसरो की हर जरुरत को पूरा कर सकेगें। दिखावा कभी आप की जिंदगी पर भी भारी पड़ सकता है

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Category : | edit post

1 Response to "आप का भविष्य चढ़ावा न बन जाये दिखावे का"

  1. Anonymous Said,

    really good...very true facts...i agree with you...really good article...keep up the good work

     

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पाश ने कहा है कि -'इस दौर की सबसे बड़ी त्रासदी होगी, सपनों का मर जाना। यह पीढ़ी सपने देखना छोड़ रही है। एक याचक की छवि बनती दिखती है। स्‍वमेव-मृगेन्‍द्रता का भाव खत्‍म हो चुका है।'
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